The Pot Maker explanation with hindi NCERT English Class 9 – Kaveri
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Ogden Nash
“The Tale of Custard the Dragon” एक मजेदार और हास्य कविता है। इस कविता में एक ड्रैगन “कस्टर्ड” की कहानी है। घर के सभी लोग खुद को बहादुर बताते हैं, लेकिन असली खतरे के समय केवल कस्टर्ड ही साहस दिखाता है। कविता हमें सिखाती है कि सच्ची बहादुरी बातों से नहीं, बल्कि काम से साबित होती है।
बेलिंडा – एक छोटी लड़की
इंक – काला बिल्ली का बच्चा
ब्लिंक – ग्रे रंग का चूहा
मस्टर्ड – पीला कुत्ता
कस्टर्ड – ड्रैगन, जिसे सब डरपोक कहते थे
बेलिंडा एक छोटे सफेद घर में अपने पालतू जानवरों के साथ रहती थी। उसके साथ इंक, ब्लिंक, मस्टर्ड और कस्टर्ड ड्रैगन रहते थे। बेलिंडा और बाकी सभी जानवर खुद को बहुत बहादुर समझते थे। वे कस्टर्ड का मजाक उड़ाते थे क्योंकि वह हमेशा सुरक्षित पिंजरा मांगता था और डरता रहता था।
एक दिन अचानक एक समुद्री डाकू (Pirate) घर में घुस आया। उसके हाथों में पिस्तौल थी और वह बहुत डरावना दिख रहा था। उसे देखकर बेलिंडा और बाकी सभी जानवर डर गए और छिप गए।
तभी कस्टर्ड ने बहादुरी दिखाई। वह जोर से दहाड़ता हुआ आगे आया और समुद्री डाकू पर हमला कर दिया। उसने डाकू को मारकर सबकी जान बचा ली।
खतरा खत्म होने के बाद सबने कस्टर्ड की तारीफ की। लेकिन थोड़ी देर बाद वे फिर से खुद को बहादुर बताने लगे।
बेलिंडा एक छोटे सफेद घर में रहती थी। उसके साथ एक काला बिल्ली का बच्चा, एक ग्रे चूहा, एक पीला कुत्ता और कस्टर्ड नाम का ड्रैगन रहता था।
कवि सभी पात्रों का परिचय देता है।
बेलिंडा और बाकी जानवर खुद को बहादुर मानते थे। लेकिन कस्टर्ड हमेशा सुरक्षित पिंजरा मांगता था।
सब लोग कस्टर्ड को डरपोक समझते थे।
बेलिंडा, इंक, ब्लिंक और मस्टर्ड सब कस्टर्ड का मजाक उड़ाते थे।
कस्टर्ड को सब कमजोर और डरपोक समझते थे।
अचानक एक समुद्री डाकू घर में आ गया। उसके दांत काले थे, आंखें लाल थीं और हाथों में पिस्तौल थी।
घर का माहौल डरावना हो गया।
डाकू को देखकर बेलिंडा डर गई। इंक और ब्लिंक भाग गए। मस्टर्ड भी डरकर छिप गया।
जो खुद को बहादुर कहते थे, वे असली खतरे में डर गए।
कस्टर्ड अचानक बहादुर बन गया। वह इंजन की तरह आवाज करता हुआ डाकू पर टूट पड़ा और उसे खा गया।
कस्टर्ड ने साबित कर दिया कि वही असली बहादुर है।
डाकू के मरने के बाद सबने कस्टर्ड की बहुत तारीफ की।
सबको समझ आया कि कस्टर्ड ने उनकी जान बचाई।
कुछ समय बाद सब फिर से अपनी बहादुरी की बातें करने लगे।
लोग जल्दी सच भूल जाते हैं और खुद की तारीफ करने लगते हैं।
यह कविता हमें सिखाती है कि:
असली बहादुरी काम से साबित होती है।
जो लोग ज्यादा डींग मारते हैं, वे जरूरी नहीं कि बहादुर हों।
शांत और साधारण दिखने वाले लोग भी सच्चे वीर हो सकते हैं।
कविता में तुकांत शब्दों का प्रयोग किया गया है जिससे कविता मजेदार और मधुर बनती है।
कुछ शब्दों को बार-बार दोहराया गया है ताकि हास्य और लय बनी रहे।
तुलना करने के लिए “like” का प्रयोग हुआ है।
उदाहरण:
“snorting like an engine”
अर्थ: कस्टर्ड हमेशा सुरक्षित रहना चाहता था, इसलिए सब उसे डरपोक समझते थे।
अर्थ: खतरे के समय कस्टर्ड बहादुरी से आगे आया।
किसी को कमजोर समझकर उसका मजाक नहीं उड़ाना चाहिए।
असली साहस मुश्किल समय में दिखाई देता है।
काम शब्दों से ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं।
“The Tale of Custard the Dragon” एक हास्यपूर्ण कविता है जिसमें बहादुरी का सच्चा अर्थ बताया गया है। कस्टर्ड, जिसे सब डरपोक कहते थे, अंत में सबसे बड़ा वीर साबित हुआ।
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