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The Adventures of Toto का विस्तृत हिंदी सारांश
The Adventures of Toto प्रसिद्ध भारतीय लेखक Ruskin Bond द्वारा लिखी गई एक हास्यपूर्ण कहानी है। इस कहानी में एक शरारती बंदर “टोटो” की मजेदार हरकतों का वर्णन किया गया है। कहानी यह भी बताती है कि जंगली जानवरों को पालतू बनाना कितना कठिन होता है।
टोटो का परिचय
कहानी का कथावाचक बताता है कि उसके दादाजी को जानवर पालने का बहुत शौक था। उनके घर में बकरी, सफेद चूहे, खरगोश, गिलहरी और कछुआ जैसे कई पालतू जानवर थे।
एक दिन दादाजी ने एक तांगेवाले के पास एक छोटा बंदर देखा। बंदर बहुत उदास लग रहा था क्योंकि तांगेवाला उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता था। दादाजी को उस पर दया आ गई और उन्होंने पाँच रुपये देकर उसे खरीद लिया। उस बंदर का नाम “टोटो” रखा गया।
टोटो दिखने में बहुत सुंदर था। उसकी चमकदार आँखें, मोती जैसे सफेद दाँत और लंबी पूँछ थी। उसकी पूँछ तीसरे हाथ की तरह काम करती थी। लेकिन वह बहुत शरारती और नटखट था।
टोटो की पहली शरारत
दादीजी को नए जानवर पसंद नहीं थे, इसलिए दादाजी ने टोटो को अपने कमरे के पास बने एक छोटे कमरे में छिपाकर रखा। उसे एक खूंटी से बाँध दिया गया।
लेकिन टोटो बहुत चालाक था। उसने दीवारों का वॉलपेपर फाड़ दिया, खूंटी उखाड़ दी और पूरे कमरे को तहस-नहस कर दिया। जब दादाजी और कथावाचक वापस आए, तो कमरा पूरी तरह बर्बाद मिला।
अस्तबल में टोटो
इसके बाद टोटो को अस्तबल में भेज दिया गया, जहाँ परिवार का गधा “नाना” रहता था। शुरुआत में नाना टोटो को पसंद नहीं करता था क्योंकि टोटो उसे परेशान करता था। धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे के आदी हो गए।
टोटो हर जगह शरारत करता था। वह कपड़े फाड़ देता, चीजें काटता और सामान खराब कर देता था। परिवार को समझ आ गया कि उसे संभालना आसान नहीं है।
सहारनपुर की यात्रा
एक दिन दादाजी को पेंशन लेने के लिए Saharanpur जाना था। टोटो को घर पर छोड़ना मुश्किल था, इसलिए दादाजी उसे एक बड़े काले कैनवास बैग में छिपाकर साथ ले गए।
टोटो बैग के अंदर लगातार उछल-कूद करता रहा, जिससे बैग हिलता रहता था। स्टेशन पर लोगों को यह देखकर आश्चर्य हुआ।
जब टिकट चेकर ने बैग से टोटो का चेहरा बाहर निकलते देखा, तो उसने उसे कुत्ता समझ लिया और दादाजी से कुत्ते का टिकट माँगा। दादाजी ने बहुत समझाया कि वह बंदर है, कुत्ता नहीं, लेकिन टिकट चेकर नहीं माना।
दादाजी ने मजाक में अपनी जेब से पालतू कछुआ निकालकर पूछा कि क्या इसका भी टिकट लगेगा। टिकट चेकर ने कहा कि कछुए का टिकट नहीं लगता।
टोटो को नहाना पसंद था
सर्दियों में टोटो को गर्म पानी से नहाना बहुत पसंद था। वह पहले अपने हाथ से पानी का तापमान जाँचता था। अगर पानी सही लगता, तो धीरे-धीरे उसमें उतर जाता और मजे से नहाता।
एक दिन चाय के लिए पानी से भरी केतली आग पर रखी थी। टोटो उसमें जा बैठा क्योंकि पानी गर्म था। धीरे-धीरे पानी और गर्म होता गया। टोटो कभी अंदर जाता, कभी बाहर आता, लेकिन केतली छोड़ना नहीं चाहता था। अंत में दादीजी ने उसे बचाया, नहीं तो वह जल सकता था।
दोपहर के भोजन की घटना
टोटो बहुत लालची और शरारती था। एक बार वह खाने की मेज पर चढ़ गया और चावल खाने लगा। जब दादीजी चिल्लाईं, तो उसने उनके ऊपर प्लेट फेंक दी।
फिर वह पुलाव की डिश लेकर पेड़ पर चढ़ गया। जब सब लोग उसके पीछे दौड़े, तो उसने पुलाव खाकर डिश नीचे फेंक दी, जिससे वह टूट गई।
टोटो को बेच दिया गया
दिन-ब-दिन टोटो की शरारतें बढ़ती गईं। वह कपड़े फाड़ता, बर्तन तोड़ता और घर का सामान खराब करता था। उसकी वजह से परिवार को बहुत नुकसान होने लगा।
आखिरकार दादाजी ने समझ लिया कि टोटो को पालतू बनाना संभव नहीं है। इसलिए उन्होंने उसे वापस तांगेवाले को केवल तीन रुपये में बेच दिया।
कहानी के मुख्य विषय
1. जानवरों के प्रति प्रेम
दादाजी का जानवरों के प्रति गहरा प्रेम कहानी में दिखाई देता है।
2. बंदरों की शरारती प्रकृति
कहानी बताती है कि बंदर बहुत बुद्धिमान लेकिन बेहद शरारती होते हैं।
3. हास्य
टोटो की मजेदार हरकतें कहानी को मनोरंजक बनाती हैं।
4. जंगली जानवरों को पालने की कठिनाई
जंगली जानवर घर के वातावरण में आसानी से नहीं ढलते।
टोटो का चरित्र-चित्रण
बहुत शरारती
चंचल और सक्रिय
बुद्धिमान
जिज्ञासु
चीजें नष्ट करने वाला
कहानी का संदेश
जंगली जानवरों को पालतू बनाना आसान नहीं होता। वे चाहे देखने में प्यारे लगें, लेकिन उनकी स्वाभाविक आदतों को बदलना कठिन होता है।
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